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Unnao Case: In a heart-wrenching letter, the victim said, "My sister... please understand my pain too." Kuldee
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Unnao Case: मार्मिक चिट्ठी पर बोली पीड़िता 'मेरी बहन..मेरा दर्द भी समझें' | Kuldeep Sengar
Video Published by: पंखुड़ी श्रीवास्तव Updated Wed, 31 Dec 2025 02:41 PM IST
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उन्नाव जिले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की छोटी बेटी द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की गई भावुक चिट्ठी और बड़ी बेटी की ओर से दुष्कर्म के आरोप को गलत बताए जाने पर पीड़िता ने प्रतिक्रिया दी है। पीड़िता ने सवाल उठाते हुए कहा कि सेंगर की बेटियों को वह बहन समान मानती हैं, लेकिन उन्हें उसका दर्द भी समझना चाहिए।
पीड़िता ने फोन पर बातचीत में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सोमवार को सेंगर की दोनों बेटियों ने उस पर कई आरोप लगाए और उसे झूठा भी बताया, लेकिन वह इसे व्यक्तिगत रूप से नहीं लेतीं। उन्होंने कहा कि यदि कुलदीप सेंगर ने उनके साथ गलत नहीं किया होता, तो वह भी आज एक सामान्य जीवन जी रही होतीं।
पीड़िता ने यह भी सवाल किया कि जिस समय घटना हुई, क्या सेंगर की बेटियां गांव में मौजूद थीं। उन्होंने मोबाइल लोकेशन को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर कहा कि गांव और उन्नाव शहर की दूरी अधिक नहीं है और कोई भी व्यक्ति 20 मिनट में वहां पहुंच सकता है।
पीड़िता ने कहा कि जब हाईकोर्ट ने कुलदीप सेंगर की सजा निलंबित की थी, तब उनके समर्थकों ने पटाखे फोड़े थे। अब जब सुप्रीम कोर्ट ने सजा निलंबन पर रोक लगाई है, तो उन पर आरोप लगाकर घेरा जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह भी न्याय मिलने के बाद ही खुशियां मनाएंगी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने केवल हाईकोर्ट के फैसले के अमल पर रोक लगाई है। आगामी सुनवाई में पहले सेंगर पक्ष, फिर सीबीआई और उसके बाद वह स्वयं अपना पक्ष रखेंगी। पीड़िता ने कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है और उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के समर्थकों की ओर से आरोप-प्रत्यारोप और बचाव से जुड़ी पोस्ट की भरमार है। इस दौरान पीड़िता और उसके चाचा के बीच मेडिकल परीक्षण से पहले की बातचीत, साथ ही पीड़िता के चाचा और कुलदीप सेंगर के बीच हुई पुरानी कॉल रिकॉर्डिंग भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।
पीड़िता ने कहा कि यदि उसके साथ गलत नहीं हुआ होता तो वह भी आम बेटियों की तरह सामान्य जीवन जीती। उन्होंने बताया कि उनके ताऊ शुरुआत से ही कुलदीप सेंगर की सुरक्षा से जुड़े कार्यों सहित अन्य जिम्मेदारियां निभाते थे। दोनों परिवारों के बीच मनमुटाव की शुरुआत वर्ष 1990 के पंचायत चुनाव से हुई, जब उनके ताऊ ने बीडीसी का चुनाव लड़ा था। सेंगर ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि गांव में एक ही नेता रहेगा। विरोध के बावजूद ताऊ चुनाव जीत गए। इसके बाद पीड़िता के चाचा ने ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ा, लेकिन वह सफल नहीं हो सके।
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