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कानपुर: बिठूर के नानाराव पेशवा पार्क में मौजूद ऐतिहासिक कुएं से जुड़ी है वीरता और आत्मबलिदान की गाथा
बिठूर स्थित नानाराव पेशवा स्मारक पार्क के काशी मुक्ता मंच के पीछे आज भी एक ऐतिहासिक कुआं मौजूद है, जो 1857 की प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की यादों को संजोए हुए है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस कुएं का निर्माण वर्ष 1835 में बाजीराव पेशवा ने महल में रहने वाले घोड़ों के लिए पेयजल की व्यवस्था के उद्देश्य से कराया था।
कहा जाता है कि 1857 की क्रांति के दौरान जब अंग्रेजी सेना ने पेशवा महल पर हमला किया, तब महल में मौजूद महिलाओं ने स्वयं को अंग्रेजों के हाथों अपमानित होने से बचाने के लिए इसी कुएं में छलांग लगाकर अपने प्राणों का बलिदान दे दिया।
आज भी यह ऐतिहासिक कुआं पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। स्थानीय लोग इसे 1857 की क्रांति और वीरांगनाओं के आत्मबलिदान का प्रतीक मानते हैं।
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