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टैक्स ऑडिट के लिए अब पेशेवरों को एक फार्म ही भरना पड़ेगा
कानपुर इनकम टैक्स बार एसोसिएशन की ओर से सोमवार को सिविल लाइंस स्थित आयकर भवन सभागार में आयकर अधिनियम 2025 के व्यवसाय अथवा पेशे के लाभ और अभिलाभ की गणना विषय पर टैक्स गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने कहा कि नया आयकर कानून सरल और व्यवहारिक है। इसमें बही खाते से संबंधित प्रावधान एक ही स्थान पर रखे गए हैं। परिभाषाओं को सरल रूप से व्यक्त किया गया। टैक्स ऑडिट के लिए अब पेशेवरों को एक ही फार्म भरना पड़ेगा।
मुख्य वक्ता, सीए गोविंद महेश्वरी ने कहा कि नया अधिनियम, 1961 के आयकर कानून की तुलना में अधिक सरल, सुव्यवस्थित और उपयोगकर्ता अनुकूल स्वरूप में प्रस्तुत किया गया है। व्यवसाय अथवा पेशे के लाभ और अभिलाभ (पीजीबीपी) से संबंधित प्रावधानों को सरल और स्पष्ट किया गया। पूर्व के अधिनियम में इससे संबंधित प्रावधान विभिन्न धाराओं में बिखरे हुए थे। नए अधिनियम में इन्हें व्यवस्थित रूप से समाहित किया गया है। व्ययों की अस्वीकृति (जैसे नकद भुगतान, संबंधित पक्षों को भुगतान आदि) को सरल भाषा में पुनर्गठित किया गया है। इससे करदाताओं एवं पेशेवरों को अलग-अलग धाराओं का संदर्भ लेने की आवश्यकता कम हो गई है। नए अधिनियम में इन्हें अलग-अलग उप-धाराओं में विभाजित किया गया है। जिससे समझना एवं अनुपालन करना अधिक आसान हो गया है। मूल्यह्रास और परिसंपत्ति नियमों में स्पष्टता अधिक लाई गई है। छोटे व्यापारियों एवं पेशेवरों के लिए अनुमानित आय संबंधी प्रावधानों को अधिक स्पष्ट एवं व्यावहारिक बनाया गया है। बही खाते और दस्तावेजों का रख-रखाव नियमों में स्पष्ट किया गया है, कि किन-किन व्यावसायों, पेशों को कौन-कौन से अभिलेख रखना आवश्यक होगा। टैक्स ऑडिट रिपोर्टिंग में बदलाव किया गया है। टैक्स ऑडिट रिपोर्ट के फार्म 3सीए, 3सीबी, 3सीडी की जगह अब एक फार्म 26 दाखिल किया जाएगा। सीए दीप कुमार मिश्र ने कहा कि यह नया अधिनियम कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी, तार्किक एवं अनुपालन-उन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जिससे करदाताओं और पेशेवरों दोनों को लाभ मिलेगा। इस मौके पर प्रदीप कुमार द्विवेदी, शरद सिंघल, मनीष श्रीवास्तव, संतोष गुप्ता, सुनील त्रिवेदी, अखिलेश तिवारी, राजीव गुप्ता, आशीष जौहरी, अवधेश मिश्रा, शिशिर शुक्ल, हरिराम अग्रवाल, शैलेंद्र सिंह, अरविंदनाथ, पवन गुप्ता, आनंद सिंह, बसंत लाल गुप्ता आदि थे।
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