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अमेठी में निलंबित सिपाही सुनील की मां बोलीं-जांच करके दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए
यूपी के अमेठी में गौरीगंज के रामसेवक पुरवा गांव निवासी एवं वर्तमान में लखनऊ कमिश्नरेट की पुलिस लाइंस में तैनात सिपाही सुनील शुक्ल ने विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार का सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करके मोर्चा खोला तो निलंबित कर दिए गए। इसके बाद गांव में पुलिस के बार-बार आने से बूढ़ी बीमार विधवा मां परेशान और भयग्रस्त हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से रो-रोकर न्याय की गुहार लगाते हुए जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही बेटे का निलंबन वापस करने की भी मांग की।
आरक्षी सुनील शुक्ल वर्ष 2015 में देश सेवा के लिए पुलिस में भर्ती हुए थे। पहली पोस्टिंग अंबेडकरनगर के थाना आलापुर में हुई थी। वर्ष 2022 में स्थानांतरण लखनऊ में हुआ और इसके बाद से लखनऊ रिजर्व पुलिस लाइंस में तैनात हैं। निलंबन की अवधि में उन्हें पुलिस लाइंस में ही संबद्ध किया गया है। सुनील ने 7 मई से 19 मई के बीच सोशल मीडिया पर लगातार छह वीडियो जारी कर खुद को प्रताड़ित किए जाने, विभागीय भ्रष्टाचार और सिस्टम की खामियों के आरोप लगाए थे।
इसकी जानकारी होने और बार-बार पुलिस आने से गांव में बूढ़ी बीमार विधवा मां श्यामा शुक्ला रो-रोकर कर कहती हैं मुख्यमंत्री जी मेरी बात सुनी जाए, बेटे को बहाल किया जाए। भ्रष्टाचार बंद किया जाए। जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
उन्होंने बताया कि सुनील के पिता हरिकरन शुक्ल को पांच वर्ष पूर्व कैंसर हो गया। उस समय इलाज के लिए उन्हें मुंबई ले जाया गया था। ऐसी स्थिति में भी सुनील को छुट्टी नहीं मिल पा रही थी। करीब तीन वर्ष पूर्व पति का इलाज के दौरान निधन हो गया। उनकी भी तबीयत खराब रहती है, लेकिन सुनील की ड्यूटी होने से इलाज में दिक्कत आती है।
कहा कि एक दिन रात में करीब 1.00 बजे पुलिस घर पर आई और नोटिस देने की बात कही। उस समय उनकी तबीयत यह सब देख और खराब हो गई। इसके बाद फिर पुलिस उनके दरवाजे पर आई। आरोप लगाया कि बेटे के साथ जो हो रहा था, उसने सिर्फ अपनी और दूसरों की परेशानियां व्याप्त भ्रष्टाचार को ही उजागर किया। इसके अलावा बेटे ने कोई चोरी व गलत काम तो नहीं किया। उनके बेटे संग पूरे परिवार को परेशान किया जा रहा है, जो गलत है। वहीं गांव के प्रधान प्रतिनिधि तीरथ मिश्र बताते हैं कि सिपाही सुनील बचपन से ही जुझारू, ईमानदार और अपने कार्य के प्रति सजग रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ को इसे संज्ञान में लेना चाहिए। ताकि, परिवार को न्याय मिल सके।
पुलिस लाइंस में तैनात सिपाही सुनील कुमार शुक्ला 20 दिनों की छुट्टी पर गए थे। इसी दौरान उन्होंने सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल किए। इनमें लखनऊ कमिश्नरेट के साथ-साथ प्रदेश की अन्य रिजर्व पुलिस लाइंस में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए। सुनील ने 7 मई से 19 मई के बीच सोशल मीडिया पर लगातार छह वीडियो जारी कर खुद को प्रताड़ित किए जाने, विभागीय भ्रष्टाचार और सिस्टम की खामियों के आरोप लगाए थे। इन वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस विभाग में मामला चर्चा का विषय बन गया और प्रशासन ने इसकी जांच शुरू कर दी। सुनील कुमार शुक्ला की पत्नी रायबरेली पुलिस में तैनात हैं। हालांकि, सुनील कुमार शुक्ल ने विभागीय जांच प्रक्रिया पर भरोसा न जताते हुए मजिस्ट्रेटी जांच की मांग की थी। उनका कहना था कि मामले की निष्पक्ष जांच बाहरी स्तर पर होनी चाहिए।
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